शनिवार(Shaniwar/Saturday)
शनिवर के दिन भगवान शनिदेव की पूजा करने का विधान है। भगवान शनिदेव व्यक्ति विशेष को कर्म के अनुसार फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वाले को शुभ फल की प्राप्ति होती है और बुरे कर्म करने वाले को शनिदेव दंडित करते हैं। शनिवार व्रत करने के नियम होते हैं जिनका पालन करने से भगवान शनिदेव प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति का आगमन होता है।
शनिवार का व्रत किसे करना चाहिए (Shaniwar ka vrat kise karna chahiye):-
✿ ज्योतिष एक्सपर्ट्स की मानें तो जिन लोगों की शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैया चल रही हो उन्हें भी शनिवार का व्रत अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से साढ़ेसाती के कारण आने वाली परेशानियां कम हो जाती हैं।
✿ अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि नीच का यानी कमजोर हो तो उसे भी शनिवार का व्रत रखना चाहिए. इसके अलावा अगर शनि से जुड़े किसी भी तरह के दोष (Shani dosh) की वजह से घर में लड़ाई-झगड़े हो रहे हों, कर्ज लेना पड़ रहा हो, मकान का कोई हिस्सा गिर जाए या आर्थिक समस्याएं इतनी बढ़ जाए कि मकान बिकने की नौबत आ जाए तो ऐसे लोगों को भी शनिवार का व्रत रखना चाहिए।
✿ अगर आपका शनिवार के दिन किसी न किसी से झगड़ा हो जाता है, पैसों से जुड़ा भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, या फिर अगर आपके द्वारा खरीदी गई कोई भी चीज जल्दी खराब हो जा रही है या टूट जा रही है और कई बार ऐसा हो चुका हो तो आपके लिए शनिवार का व्रत रखना फलदायी हो सकता है।
✿ कुंडली में राहु केतु (Rahu ketu) से जुड़ी कोई समस्या तो उन लोगों को भी शनिवार का व्रत रखना चाहिए. ऐसा करने से राहु, केतु की कुदृष्टि से सुरक्षा मिलती है और अगर शनिदेव खुश हो जाएं तो व्यक्ति को धन-संपत्ति और सम्मान की प्राप्ति होती है।
कितने शनिवार तक करना चाहिए व्रत (Kitne Shaniwar tak karna chahiye vrat):-
ज्योतिष शास्त्र की मानें तो अगर आप शनिवार का व्रत करने का संकल्प लेते हैं तो आपको 7 शनिवार तक व्रत रखना चाहिए. शनिवार का व्रत रखना शुरू करना चाहते हैं तो शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से व्रत आरंभ करें. हालांकि अगर आप श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करते हैं तो उसका विशेष लाभ मिलता है.
शनिवार व्रत कथा (Shaniwar vrat katha):-
प्रचलित शनिवार व्रत कथा के अनुसार, कुछ समय पहले की बात है, एक गांव में एक धनी व्यापारी रहते थे। उनका धन बहुत अधिक था, लेकिन उनमें अकारण घमण्ड था। वे अनेक सेवकों के साथ रहते थे, लेकिन उनका मन निराशा से भरा रहता था। एक दिन, उन्हें अपने गांव के ज्योतिषी ने सलाह दी कि उन्हें शनिवार के दिन शनिदेव का व्रत करना चाहिए। वह व्रत करने से धन, समृद्धि और शुभकामनाएं प्राप्त कर सकते हैं। व्यापारी ने उस ज्योतिषी की सलाह को स्वीकार किया और शनिवार के दिन से ही व्रत शुरू कर दिया।
पहले कुछ समय तक व्यापारी व्रत का पालन थोड़ी समझौते के साथ करते रहे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इस व्रत के महत्व का अनुभव होने लगा। शनिवार के दिन उन्हें अपने दुःखों को भुलाने की शक्ति मिलती थी और वे ध्यान में लग जाते थे। शनिवार के दिन धीरे-धीरे उनका व्यापार भी चमकने लगा। उनके ग्राहक और व्यापारी मित्र उनसे प्रसन्न होने लगे और उनका सम्मान करने लगे। धन के साथ-साथ उन्हें सबका स्नेह भी मिलने लगा।
एक शनिवार को व्यापारी ने बड़ा धन कमाने का लक्ष्य रखा। लेकिन व्यापार में उन्हें नुकसान हो गया और सारा पैसा खत्म हो गया। उन्हें बड़ा धक्का लगा और उनका मन अधीर हो गया। व्यापारी दुखी होकर घर लौट रहे थे कि रास्ते में एक साधू बाबा का सामना हुआ। साधू बाबा ने उनके चेहरे की परेशानी देख ली और उनसे उनकी समस्या पूछी। व्यापारी ने सभी बातें बता दीं। साधू बाबा ने उन्हें शनिवार के व्रत के महत्व के बारे में बताया और उन्हें व्रत के प्रति सच्ची आस्था रखने की सलाह दी।
व्यापारी ने साधू बाबा के वचनों पर विश्वास किया और शनिवार के व्रत में आनंद और भक्ति से लग गए। धीरे-धीरे उनका व्यापार फिर से सफल होने लगा और वे और भी धनवान हो गए। इसके बाद, उन्होंने अपने सेवकों के साथ अच्छा व्यवहार किया और नेक कार्यों में समय बिताने लगे। इस कथा से समझ में आता है कि शनिवार के व्रत से व्यक्ति को न केवल शनि देव की कृपा मिलती है बल्कि उसे दृढ़ता, धैर्य और समर्पण की भावना भी प्राप्त होती है। शनि देव का व्रत करने से भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शनि देव की आरती (Shanidev ki aarti):-
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी । नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
शनिवार व्रत के नियम (Shaniwar vrat ke niyam):-
जो लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार का व्रत रखते हैं उन्हें कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए-
✿ इन लोगों को व्रत से एक दिन पहले मांस, मदिरा या फिर तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
✿ शनिवार के दिन स्नान के बाद शनि देव की पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
✿ स्नान के बाद पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें और इसके चक्कर लगाकर शनि देव की आराधना करें।
✿ इसके बाद पीपल के पेड़ को सात बार कच्चे सूत से लपेटना चाहिए।
✿ शनिवार के दिन हर किसी को मन, वचन और कर्म से शुद्ध होना चाहिए।
✿ शनिवार के दिन व्रत रखा है तो इस दिन फलाहार करें और शनि देव की कथा सुनें।
✿ शनिवार व्रत कथा का पाठ करने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
✿ शनि देव की संध्या आरती जरूर करें।
✿ शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन शनि देव की लोहे की मूर्ति का पूजन करना चाहिए। साथ ही उन्हें उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे काला तिल, सरसों का तेल और काला वस्त्र अर्पित करना चाहिए।
✿ इस दिन कम्बल का दान करना भी अच्छा माना जाता है।
✿ शनि पीड़ा की शांति के लिए शनिवार के दिन शनि के मंत्र और स्तोत्र का जाप करना चाहिए।
✿ इस दिन एक चुटकी लाल चंदन पानी में डालकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
✿ बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए शनिवार के दिन शनि ग्रह की छाया का दान करना चाहिए।
✿ अगर आपने शनिवार का व्रत रखा है तो अगले दिन शनि देव की पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें क्योंकि पारण करने से ही व्रत पूर्ण माना जाता हैं।

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