फुलेरा दूज की व्रत कथा, विधि, नियम और पूजन सामग्री। और इस फूल से होंगे श्री कृष्ण और राधा जी प्रसन्न।। Phulera dooj ki vrat katha, vidhi, niyam aur pujan samagri

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फुलेरा दूज: 


फुलेरा दूज पर इस विधि से करें श्री राधा-कृष्ण की पूजा, वैवाहिक जीवन में बनी रहेगी खुशहाली बनी रहती है। 

फुलेरा दूज के दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से लोगों को वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है. फुलेरा दूज के दिन किस विधि से पूजा-अर्चना करें और किस तरह के फूल अर्पित करें और क्या भोग लगाएं. जानने के लिए पढ़ें ये लेख...


फुलेरा दूज की पूजा विधि: 


हिन्दू धर्म में हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बड़े ही उत्साह के साथ फुलेरा दूज मनाई जाती है और इस दिन पूरे विधि-विधान से श्री राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है. फुलेरा दूज के मौके पर हर साल मथुरा में फूलों की होली खेली जाती है. मथुरा में फुलेरा दूज पर फूलों से होली मनाने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. इस पर्व की मान्यता है कि फुलेरा दूज के दिन श्री राधा-कृष्ण की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से लोगों के वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है. आइए जानते हैं कि फुलेरा दूज पर श्री राधा-कृष्ण की कैसे पूजा करें और क्या विधान है?


हिंदू धर्म में फुलेरा दूज का विशेष महत्व है. भगवान् कृष्ण के भक्तों के लिए यह दिन बहुत ही खास होता है. इस दिन लोग सारे मांगलिक कार्य बिना किसी मुहूर्त के भी कर सकते हैं क्योंकि यह दिन बहुत शुभ होता है. इस लोग आप विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, जैसे सभी कार्य पूरे दिन कर सकते हैं. फुलेरा दूज के दिन श्री राधा कृष्ण का विभिन्न प्रकार के फूलों से श्रृंगार किया जाता है तथा घरों में फूलों से रंगोली बनाई जाती है. मथुरा-वृंदावन में सभी कृष्ण मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है तथा राधा कृष्ण के संग फूलों की होली खेली जाती है.



फुलेरा दूज की व्रत विधि

✿ फुलेरा दूज के दिन सबसे पहले लोगों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर श्री राधा-कृष्ण के ध्यान से दिन की शुरुआत करें। 

✿ इसके बाद सुबह जल्दी स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करें और श्री राधा-कृष्ण का गंगाजल, दही, जल, दूध और शहद से अभिषेक करें। 

✿ फिर श्री राधा-कृष्ण को नए वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार करें और उन्हें चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर विराजमान करें। 

✿ इसके बाद उनके ऊपर टोकरी से फूलों की बरसात करें. इसके बाद नैवेद्य, धूप, फल, अक्षत समेत विशेष चीजें अर्पित करें। 

✿ फुलेरा दूज पर श्री राधा-कृष्ण की पूजा के लिए घी का दीपक जलाकर उनकी आरती और मंत्रों का जाप करें। 

✿ फिर श्री राधा-कृष्ण को माखन मिश्री, खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं और भोग में तुलसी दल को अवश्य शामिल करें। 

✿ मान्यता है कि बिना तुलसी दल के भगवान श्री कृष्ण भोग नहीं लगाया जाता है। अंत में वह भोग लोगों को प्रसाद के रूप में बांट दें। 


श्री राधा-कृष्ण को अर्पित करें ये फूल

फुलेरा दूज के दिन मथुरा में फूलों की होली बड़े ही उत्साह के साथ खेली जाती है और इस मौके पर श्री राधा-कृष्ण को गेंदे समेत 7 प्रकार के फूल अर्पित किए जाते हैं, क्योंकि इस दिन वृन्दावन में भक्त आमतौर पर राधा-कृष्ण के प्रेम को व्यक्त करने के लिए उन पर फूलों की बरसात करते हैं और फूलों की होली खेलते हैं. इस दिन श्री कृष्ण व राधा रानी को गेंदे की तरह-तरह की वरायटी, गुलाब, चमेली, कमल, हरश्रृंगार, डहेलिया, गुल्दाउदी इन सभी फूलों को विशेष रूप से श्री कृष्ण व राधा रानी को अर्पित किया जाता है.


फुलेरा दूज की व्रत कथा-



फुलेरा दूज की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण राधा जी से बहुत दिनों तक नहीं मिले जिसके कारण राधा जी उदास रहने लगी उनके उदास होते ही वृंदावन के सारे फूल मुरझा गए। पेड़ सूखने लगे डालिया टूटने लगी राधा जी की उदासी देखकर पक्षियों ने पहचाना बंद कर दिया नदी की धारा स्थिर रह गई और वृंदावन में भी उदासी छाने लगी। भगवान कृष्ण से मिलने की वजह से राधा जी उदास रहने लगी जिसे देखकर गोपियां भी बहुत उदास रहती थी। राधा जी बस भगवान कृष्ण के दर्शन की आस लगाए बैठी रहती थी वह न तो कुछ खाती और न ही जल पीती थी। 

जब भगवान कृष्ण ने वृंदावन की यह स्थिति देखी तो उन्हें आभास हुआ की यह सब राधा जी के कारण हो रहा है। राधा मुझे पुकार रही है और उदास स्तिथि में रहती है जिसके कारण वृंदावन में कली कली मुरझा गई है। ऐसी दशा देखकर भगवान कृष्ण जी वृंदावन के लिए निकल पड़े और राधा जी से मिलने के लिए वृंदावन आने लगे । जैसे ही कान्हा के आने की खबर मिली राधा जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उनका चेहरा खिल उठा । फूल खिलने लगे, पक्षी चहचाने लगे, पेड़ हरे भरे हो गए। सभी गोपियां खुश हो गई।

भगवान कृष्ण राधा जी से मिले उनसे मिलकर राधा जी बहुत प्रसन्न हुई। कान्हा ने पास से फूल तोड़ा और राधा जी पर फेंका यह देखकर राधा जी भी कान्हा पर फूल फेंकने लगी। यह देखकर सभी ग्वाल और गोपियां एक दूसरे पर फूल फेंकने लगे और वृंदावन में त्योहार हो गया। वह दिन फुलेरा दूज का था। तभी से ही फूलों की होली खेलने का प्रचलन शुरू हुआ।

हर साल मथुरा वृंदावन में इसी दिन फूलों की होली खेली जाती है। हर साल फुलेरा दूज के दिन मंदिरों को सजाया जाता है और राधा कृष्ण के साथ फूलों की होली खेली जाती है।


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