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विनायकी चतुर्थी की व्रत कथा
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एक समय की बात है, किसी गांव में एक विष्णु शर्मा नाम के ब्राम्हण रहते थे। वह वेदों के ज्ञाता थे और उनके साथ पुत्र थे, जिनमें से 6 पुत्र संपन्न थे। लेकिन एक पुत्र गरीब था। उनके सभी बेटे अलग-अलग रहते थे।
विष्णु शर्मा अपने हर एक पुत्र के घर एक एक दिन भोजन करते थे। धीरे धीरे वह वृद्ध होकर दुर्बल हो गए वह अपनी पुत्रवधू द्वारा अपमानित होकर रोते रहते थे। एक बार विष्णु शर्मा ने गणेश चौथ का व्रत रखा। और अपने सबसे बड़ी बहू के घर पहुंचे और बोला "बहू मैंने आज गणेश चौथ का व्रत किया है तुम पूजा का सामान इकट्ठा कर दो भगवान गणेश खुश होकर तुम पर कृपा करेंगे" ।
यह सुनकर बहु कठोर वाणी में बोली "पिताजी मुझे तो घर के कार्यों से ही फुर्सत नहीं है मेरे पास इन फिजूल के कामों के लिए समय नहीं है आप तो हमेशा कुछ ना कुछ काम बताते रहते हो मैं नहीं जानती आप के गणेश जी को"।
सबसे बड़ी बहू से डांट सुनकर विष्णु शर्मा अपनी सभी बहू के घर गए, परंतु सभी ने उन्हें डांट कर भगा दिया। वह बहुत दुखी हुए और अंत में अपनी छोटी बहू के घर गए।
छोटी बहू के घर भी वे समझाते हुए बोले "बहुरानी सब बहुओं ने तो मुझे डांट कर घर से निकाल दिया अब मैं कहां जाऊं तुम्हारे पास तो मेरे व्रत की सामग्री लाने के भी पैसे नहीं है"।
बहू बोली "ससुर जी आप परेशान ना हो और अपनी इच्छा पूर्वक व्रत करें। आपके साथ में भी व्रत करूंगी"। ऐसा कहकर छोटी बहू पड़ोसन से व्रत की सामग्री मांगने गई।उसने अपने ससुर के साथ पूजन किया। पूजन के बाद खाने की कमी से खुद भूखा रहकर ससुर को खाना खिलाया। और खुद भूखी ही सो गई। आधी रात के बाद ससुर को उल्टियां होने लगी। वो रोने लगी बोली "पिताजी मेरे बनाए हुए खाने से आपको उल्टियां होने लगी"। और वह सारी रात अपने ससुर के पास बैठी रही।
इस प्रकार उसका व्रत के साथ-साथ गणेश चौथ का जागरण भी हो गया। सुबह उठकर उसने देखा कि उसका सारा घर हीरे मोतियों से जगमग आ रहा है। अपने ससुर से बोली "पिताजी इतने हीरे मोती मेरे घर में कहां से आए"। तब ब्राह्मण विष्णु शर्मा बोले "बहु यह सब तो तुम्हारी भक्ति का फल है जिससे भगवान गणेश प्रसन्न हो गए हैं और उस व्रत के फल स्वरुप तुम्हें इतना धन मिला है"।
बहू बोली पिता जी आपकी कृपा से गणेश जी मुझ पर प्रसन्न हुए हैं और मुझे अपार धन संपत्ति प्राप्त हुई है छोटी बहू के घर में इतनी धन-संपत्ति देखकर विष्णु शर्मा के सभी बेटे और बहू में वहां आ गए और क्रोधित होकर बोले "बुड्ढे ने अपना सारा जमा किया हुआ धन सबसे छोटे बेटे को दे दिया है"।
तब विष्णु शर्मा बोले इसमें मेरी कोई कृपा नहीं है छोटी बहू के गणेश चौथ का व्रत करने से भगवान गणेश ने प्रसन्न होकर यह संपत्ति उसे प्रदान करी है मैंने पहले तुम सभी बहू के घर पर जाकर यह व्रत करने को कहा था। परंतु तुमने मेरी एक ना सुनी छोटी बहू ने मांग कर पूजा की सामग्री एकत्रित करें यह व्रत करा और इसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने इसे अपार संपत्ति प्रदान करी है।

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